खाटू श्याम चालीसा और आरती| मनोकामना पूर्ति के लिए खाटू श्याम चालीसा का पाठ कैसे करें

खाटू श्याम चालीसा और आरती

खाटू श्याम हिंदू धर्म के एक प्रमुख देवता हैं, जिनकी पूजा मुख्य रूप से राजस्थान के खाटू गांव में की जाती है। खाटू श्याम भगवान श्री कृष्ण के अवतार माने जाते हैं, और उनका असली नाम बर्बरीक था। बर्बरीक, महाभारत के समय में भीम के पोते थे और उनका जन्म भीम के बेटे घटोत्कच और अहिलवती के घर हुआ था।

खाटू श्याम की पूजा के पीछे एक दिलचस्प कथा है। बर्बरीक ने अपनी महाशक्ति के बल पर युद्ध के मैदान में हर किसी को पराजित करने की क्षमता प्राप्त की थी। वे भगवान कृष्ण से मिलने गए और कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा कि अगर वह युद्ध में सबसे शक्तिशाली हैं, तो वह कौन सा स्थान चाहेंगे। बर्बरीक ने कहा कि वह युद्ध के दौरान सबसे पहले अपने सिर को भगवान कृष्ण को अर्पित करेंगे। इसके बाद, कृष्ण ने बर्बरीक को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उनका सिर खाटू में रहेगा और यहां उनके दर्शन से भक्तों को मुक्ति मिलेगी।

खाटू श्याम की पूजा भक्तों को मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। खाटू श्याम का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु खाटू गांव आते हैं, जहां उनकी विशेष पूजा की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि खाटू श्याम की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सभी दुःख-दर्द दूर होते हैं।

खाटू श्याम को दीननाथ, श्याम बाबा, और भक्तन के रक्षक के रूप में भी जाना जाता है। उनका नाम लेने से जीवन में हर प्रकार की परेशानी का समाधान होता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


यह भी पढ़े

श्री खाटू श्याम चालीसा
।।दोहा।।
श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द।
श्याम चालीसा भणत हूं, रच चौपाई छंद।

।।चौपाई।।
श्याम श्याम भजि बारम्बारा। सहज ही हो भवसागर पारा।
इन सम देव ना दूजा कोई। दीन दयालु न दाता होई।
भीमसुपुत्र अहिलवती जाया। कहीं भीम का पौत्र कहाया।
यह सब कथा सही कल्पनान्तर। तनिक ना मानों इसमें अन्तर।
बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।
वसुदेव देवकी प्यारे। यशुमति मैया नन्द दुलारे।
मधुसूदन गोपाल मुरारी। बृजकिशोर गोवर्धन धारी।
सियाराम श्री हरि गोविन्दा। दीनपाल श्री बाल मुकन्द।
दामोदर रणछोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी।
नरहरि रूप प्रह्लाद प्यारा। खम्भ फारि हिरनाकुश मारा।
राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता। गोपी वल्लभ कंस हनंता।

मनमोहन चित्तचोर कहाए। माखन चोरि चोरि कर खाए।
मुरलीधर यदुपति घनश्यामा। कृष्ण पतितपावन अभिरामा।
मायापति लक्ष्मीपति ईसा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।
विश्वपति त्रिभुवन उजियारा। दीन बन्धु भक्तन रखवारा।
प्रभु का भेद कोई ना पाया। शेष महेश थके मुनिराया।
नारद शारद ऋषि योगिन्दर। श्याम श्याम सब रटत निरन्तर।
करि कोविद करि सके न गिनन्ता। नाम अपार अथाह अनन्ता।
हर सृष्टि हर युग में भाई। ले अवतार भक्त सुखदाई।
हृदय मांहि करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा।
कीर पढ़ावत गणिका तारी। भीलनी की भक्ति बलिहारी।
सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्राप वश शिला दुखारी।
श्याम चरण रज नित लाई। पहुंची पतिलोक में जाई।
अजामिल अरू सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई।
जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दु:ख दूर हो सारा।
श्याम सुलोचन है अति सुन्दर। मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर।
गल वैजयन्ति माल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मन भाई।
श्याम श्याम सुमिरहु दिनराती। शाम दुपहरि अरू परभाती।
श्याम सारथी जिसके रथ के। रोड़े दूर होय उस पथ के।
श्याम भक्त न कहीं पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा।
रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के हाले।
संसारी सुख भोग मिलेगा। अन्त श्याम सुख योग मिलेगा।
श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले भाले।
श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग दोष अघ नाशै भारी।
प्रेम सहित जे नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा।
खाटू में है मथुरा वासी। पार ब्रह्म पूरण अविनासी।
सुधा तान भरि मुरली बजाई। चहुं दिशि नाना जहां सुनि पाई।
वृद्ध बाल जेते नारी नर। मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर।
दौड़ दौड़ पहुंचे सब जाई। खाटू में जहां श्याम कन्हाई।
जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा।

।।दोहा।।
श्याम सलोने सांवरे, बर्बरीक तनु धार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार।

खाटू श्याम जी की आरती-

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटूधाम में विराजमान, अनुपम रूप धरे।। ॐ जय…
रत्नों से सुसज्जित सिंहासन, सिर पर चँवर ढलते।
शरीर केसरिया रंग में, कान में कुंडल चमकते।। ॐ जय…
गल में पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट सजे।
धूप, अग्नि पर चढ़ी, दीपों की ज्योति रमे।। ॐ जय…
मोदक, खीर, चूरमा, सुवर्ण थाल सजते।
सेवक भोग अर्पित करते, नित्य सेवा में लगे।। ॐ जय…
झांझ, कटोरा, घड़ियाल, शंख और मृदंग की ध्वनि।
भक्त आरती गाते, जय जयकार करते।। ॐ जय…
जो श्याम का ध्यान करे, वह फल पाता है।
सभी दुखों से उबरता है, भक्त जन हमेशा श्याम का नाम लेते।। ॐ जय…
"श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई गाता।
कहत आलू सिंह स्वामी, हर इच्छा पूरी होती।। ॐ जय…
जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, सभी काज पूर्ण किए।। ॐ जय…

खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने  लाभ -

  1. भवसागर से मुक्ति:
    खाटू श्याम चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली समस्याएं और कष्ट दूर होते हैं। यह पाठ व्यक्ति को भवसागर से पार करने में मदद करता है और उसे मानसिक शांति प्रदान करता है।

  2. भक्तों का आशीर्वाद:
    खाटू श्याम भगवान दीननाथ और भक्तों के प्रति अत्यधिक दयालु हैं। इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों को भगवान का विशेष आशीर्वाद मिलता है, जिससे उनकी परेशानियां हल हो जाती हैं।

  3. रोगों का नाश:
    खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने से शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा मिलता है। विशेष रूप से जो लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें इससे राहत मिल सकती है।

  4. सकारात्मक ऊर्जा:
    इस चालीसा का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो व्यक्ति को नकारात्मक विचारों और भावनाओं से मुक्त करता है। इससे जीवन में उत्साह और ऊर्जा बनी रहती है।

  5. आर्थिक समृद्धि:
    खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने से आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सकता है। यह भगवान की कृपा को आकर्षित करता है, जिससे आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।

  6. सच्चे प्रेम की प्राप्ति:
    इस चालीसा के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सच्चे प्रेम की प्राप्ति करता है। इसके जाप से भावनात्मक संतुलन और पारिवारिक संबंधों में सुधार होता है।

  7. कष्टों का निवारण:
    यदि व्यक्ति किसी गंभीर कष्ट या विपत्ति का सामना कर रहा हो, तो खाटू श्याम चालीसा का पाठ करने से वह कष्ट दूर हो सकता है और जीवन में सुख-शांति का अनुभव होता है।

  8. कर्मों का शुद्धिकरण:
    खाटू श्याम चालीसा का जाप करने से व्यक्ति के सभी पाप कर्म नष्ट होते हैं और उसका आत्मा शुद्ध होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

इस प्रकार, खाटू श्याम चालीसा के नियमित पाठ से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।




एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ